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सीख रहल छी

Dinesh Rasya
August 24  ·

सीख रहल छी

कोना खडा होइ
कोना बैठी
कोना चली
आ कोना जीन्गी जीबी
सीख रहल छी ।

चीन्ह रहल छी
एक टकीया
दश टकीया
नमरी
पन्सैहिया
के अपन, के आन
चीन्ह रहल छी ।

ब्यतीत करैछी
साँझ, भोर
यौबनक पोरे पोर
कि करिया
किछु गोर
समय अपन जीबनकs
ब्यतीत करै छी
...........
दिनेश रसिया
२०7३,5,8
................

के जितलै ?

के जितलै ?

आइ हम बिगरलौह
कि हमर बिचार बिगरलै
एकटा कंशके मारलेल
सातटा कृष्ण पहिले मरागेलै
अहि कहू के जितलै ?

कंश भेलै
तै कृष्ण भेलै
कृष्ण येलै
तै कंश गेलै
कंश गेलै त गेलै
फेर कृष्ण कत गेलै
जैन भाग्वत गीतासंग
कृष्ण कतौ हरा गेलै
कहू के जितलै ?

एकटा कृष्ण रहै
एकटा कंश रहै
आब त घर–घरमे
कंशक डेरा छै
हर मनमे कंशक
बसेरा छै
आब कतेक कृष्णके
कमी खजलै
एत के जितलै ।

ने कंश जितलै
ने कृष्ण जितलै
समयके गति
समान बितलै
तखन निक
बिचार जितलै ।


दिनेश रसिया
२०७३,५,१०
श्रीकृष्णजन्माष्ठमी लहान ।

****गजल****

****गजल****
खडा होनाइ अपन पैरपर बात इS त निक हइ
सब दिन माइङक काम चलेनाइ इ त भिख हइ।
गिर सS पहिने समहैर जेनाइ बहुत निक बात
गिरके जे समहैर जाइ से त बढका सिख हइ।
डेग डेग पर पाथर छै चलुु कनि बैच कS
इज्जत आगा नहि झुकनाइ इS त बढका सीख हइ।
अपन स्वाभिमान बचाक रखनाइ पहिचान थिक
हिन्दु मुस्ल्मि बीचक बडका रोडा त टीक हइ।
देख दस्तुर दुनियाके आइ परेसान भेल छै रसिया
साँझ सबेरे दिन दुपहरिया सबके लागल दिक हइ ।
दिनेश रसिया
२०७३,५,६
स.चौ.आ.अ.लहान
सुझाबक आश .....

रचना - GeeT

रचना  - GeeT


दुखके ढेकीमें कुटानी करब
चिंताके जत्तामे पिसानी करब
मेहनत करब खुब अपन गाममे
मिथिलेमे जाक मेहमानी करब

खर्रा ढाकील पात खर्रब फुलबारीमे
झिझिया खेलब सलहेशक अगाडीमे
मिलक दीपो जरायब सगें इद दियारीमे
फुट कहियो हेतैनै कखनो  भैयारीमे
अपन पहिचानमे नै कहियो परेशानी करब

माजि झुटका बनायब सोन चौरी चाँचरमे
पानिक फूल मखान सुखायब मायक आँचरमे
सोनसन भोर आन राजा जत हर जोतैय
नजर गुजर भाइग जाइ बौवा आइखक काजरमे
खेल खेलब हम कबडी कबडी खेतमे पहलमानी करब


काम भेटतै खुब गाममे, जौँ सिखब अपन शीप
पानि भरले बासन चाही तेल भरले टीप
अपन दुनु पैर जमाके राखब जौ आङ्गनमे
पिछर हुवे चाहे चाल हुवे होयबनै अहाँ सिलिप ।
मिथिलामे रोजगाडी बढब, नै कखनो बैमानी करब ।

दिनेश रसिया
2073/4/2

गजल

गजल आगामें भीड़ देख लोग नुकाइ छै ।
पैसाके आगा प्रेम नै सुझाइ छै ।

लुच्चाके बातकी विद्वानों छै सनकल
बेरे बखतमे संसार चिन्हाइ छै ।

बेटा मरल त पुतहु बनल बिधबा,
अपनले बुरहोमे बरतोहार खोजाइ छै ।

टाँगल छै नेह सगरो खुटरी देबालमें
खीजे गहूमक सेतुवा पिसाई छै ।

सुचना पठेबाक लेनेछै जे ठेक्का
कहियोकाल ढौवाले ओहो बिकाइ छै ।
दिनेश रसिया 2073/3/30

***गीत****


***गीत****

विधवा कहिकS चुडी लहठी सब तोरलकै आइ
देखकS दुनियाके रीति हमर मोन कनैये भाइ ।

खेल्ते कुइदते नैन्हियेटामे कनिया बनलि
बनैत किशोरी सोनितनोर घुइट-घुइटकS पीबलि
सुखकS अनुभव करैस पहिने माँग उजरलै हाइ
देखकS ................

सीपकS सेनूर जखन उजरलै
पढिया साडीकS कफन चहरलै
सुख सेहेनता हमर सब अछियामे देलकS जराय
देखकS ......

विधिके विधिना, पिया छोडी गेली हमरा
सुरैत देख हमर बिगरै सबहकS जतरा
अपने घरे फेरोसं ओ बना देलकS पराइ
देखक............

छि मिथिलाके बेटी, प्रतिकार किए नै करै छी
दोसरके खुशी जोगब, भैर दुनियासं लडै छी
बिटे नै बचतैत कोपर कतसं लौबे गे माइ
देखक............

विधवा कहिकS चुडी लहठी सब तोरलकै आइ
देखकS दुनियाके रीति हमर मोन कनैये भाइ ।

दिनेश रसिया
२०६३,३,२१
सुझाबक आश रखने छी ।

===गजल===


===गजल===


जिनगीमे सगरो अछि काँट भरल रस्ता ।
परवाह कनिको नइ महंग होय आ सस्ता ।।

अपन सौँसे देवालमे सियाही पोतल छै,
देख हाल दोसरके ठहक्का माइर हस्ता ।।

गिरबा दोसरके खाइध खुनब माहिर छै
कि पता ओकरा आगा जाके अपने खस्ता ।।

बाढीके हिलकोर समैझ हेल गेलै पानिमे,
ढेहमे नइ रुकै पाइर, भभसीमे धस्ता ।।

पिब भेटे माँर नै, घर उपर चार नै
भुजा रोटी छोइर चाही माँछ दारु नस्ता ।।

सुइन बोली ओकर सबके काटैय बिसपिपडी,
बिना मतलबके बात ओ बेर बेर घस्ता ।।

सुइन तामस उठै जोर रसियाके बातपर
भाउ पता चलतै जखन जालमे ओ फस्ता ।

दिनेश रसिया
२०७३,३,३०