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****गीत****

****गीत****


बनल एहि दुनियामे आदमी हैवान हो
अपन बेटा जोगाब, लैय हमर प्राण हो

दुधबा पियेलियै हम, जाहि मनुखके
कन्हियो नै बुझै रामा हमर इ दुखके
छुरी रेति रेति करै छै हलाल हो
अपन..........

भेटत भगवान जखन कहबै समधिया
रस्तामे भेटल रहै बुरही बकरिया
कानि कानि कशैत रहै, सुन छै दलान यौ
अपन........

करै छि मिनतिया इ सकल समाज के
माए बेटा एके होइ छै, दुनिया जहान मे
जाइन निमुखा नैह करु अत्याचार यौ
अपन बेटा जोगब नै लियौ केकरो जान यौ ।

दिनेश रसिया
२०७३–३–२३
सुझाब अवस्य देब .

...निरगुन...

...निरगुन...



जाइके छै पियाके महल
मोहके छै बेरीया परल
बिचेमे हंसा हमर भुलायल छौ हो राम ।

जनमक बेरिया हो रामा
पियाक सुधिया विसरलौ
गौवनाके बेरिया याद सतावै हो राम ।हो हो हो

एक त बयस मोर पाञ्चम
रंगल चुनर रंग आठम
ताहि पर रतिया लागै भयावन हो राम । हो हो हो

सासु जी अघोर निन सुतै
ननदी के निनियो ने टुटै
आ पियाके कहरिया आयल दुवारे हो राम । हो हो हो

कोइ हमर गोरबा जे पकडै
कोइ जन्जिर झिन्झिर बीच जकडै
कोइ हमर गर्दैन करै हलाल हो राम ।हो हो  ।हो हो हो

✍दिनेश रसिया
लहान,मिथिला( नेपाल
२०७२–३–२३

#कविता #जीनगीक बाटमे


#कविता#जीनगीक बाटमे


नचबै छै जिनगी,
तैँ हमरो नाचS परतै ।
लहास परल भूँभूँर आइगमे,
अछियामे फेर आँचS पडतै ।।

जीवन कखनो मरुभूमि छै,
कखनो जोतल खेत ।
मरुभूमिमे गाछ लगा,
खेत फेरो गजारS पडतै ।।

जीवनमे मृत्यु सत्य थिक,
ओहमे सत्य बुढापा ।
जिवनक अहि खेलके,
कखनो उसारS पडतै ।।

माइ बाबु वा अर्धाङ्गनी
कि बेटा कि बेटी ।
एक दिन नैया बीच भँवर सS
असगरे गुजारS पडतै ।।

ऐलौ खाली हाथ एत
जायब किछ नै लधने ।
कए किछ निक करम
जीनगी धन्य बनाबS पडतै ।।

#दिनेश रसिया
२०७३,३,२१

===गजल===

===गजल===


हम कटहरके कमरी आ अहाँ कुवा छी ।
जोखबतs अहाँ पसेरी हम लाबादुवा छि ।

जीनगी आइ बाचल यS हमरेसं अहाँक,
हम फेकल केथरी अहाँ सियल नुवा छी ।

फाडी मोन हमर आइ आमिल दS दुधमे,
हम  घोंटल घोर आ आहाँ प्रेमक खुवा छी ।

हमरे सs पुरल सब अहाँ के मनोरथ
अहाँ मोनक मालिक आ हम बिलटुवा छी ।

तैयो अहिक खुशी चाहैयS अखनो 'रसिया'
अहाँ बनियौ हर आ हम ओकर जुवा छि ।

दिनेश रसिया
सरल वार्णिक बहर
२०६३,३,१९

सुझावक लेल सादर आमन्त्रित छी ।

कविता

Dinesh Rasya 
कविता
=====

कहतौ कविता
सुन्तौ कविता
अपन शब्दक जालमे
बुन्तौ कविता

सिङ्गारतौ कविता
विगारतौ कविता
अखारक कादो थालमे
लथारतौ कविता

मारतौ कविता
तारतौ कविता
जीवनके हर क्षणमे
सुधारतौ कविता

पसारतौ कविता
उसारतौ कविता
माइटक थाल जका
खिचारतौ कविता

पढेतौ कविता
लिखेतौ कविता
जीवनक गुणा भाग
सिखेतौ कविता

हसेतौ कविता
कनेतौ कविता
बचपनके सब याद
दिएतौ कविता

हरेतौ कविता
जितेतौ कविता
मरला उपरान्त फेरो
जिएतौ कविता

लडतौ कविता
नैडरतौ कविता
मुस्किल तोहर हमर
हटेतौ कविता

दिनेश रसिया
२०७३ ३ १८

{बस ओहिना}

++++गजल++++

Dinesh Rasya

++++गजल++++


फुल सटल रहैछै काँट लगाके ।
पानि बहबो करैछै बाट लगाके ।

बाँसक पत्ता आ कर्ची जोगाब सs निक,
पुरा बिटेके घेर लियs टाट लगाके ।

इ जिनगीमे राइत भोर हेबे करै अछि,
सब तरहक आनन्द लियs खाट लगाके ।

आनबै तs भोर हेतै  मिथिलोमे मीत,
नबतुरियोके चला दियौ लाट लगाके  ।


देख रिती समाजक मोनमे भोकैए सूल
इज्जत बेच रहल लोक एत हाट लगाके ।

झुठे स्वाङ्ग धेने छी ,खार बना काम के
कारी कम्मर खिचै छी अहाँ घाट लगाके ।

अहाँ कुम्हरा आ चिकनी माइट रसिया
अहाँ बर्तन बना लिया पाट लगके ।

Dinesh Rasiya 2073/3/17

====चान====

+++++कविता ++++
====चान====

चान अधहो निक
चान पुरो निक

चान हमरो निक
चान तोरो निक

चान चाने छियै
चान आने छियै
चान पिरीमे राखल
सब भगवाने छियै
चान घरो कनै
चान बहरो कनै
चान रस्ता ओगरने
चान हरदम कनै
चान माइयो छियै
चान बेटी छियै
चान अर्धाङगनी
चान बहिन छियै
चान जोगब परतै
चान बचब परतै
चान जिनगी हमर
चान हसब परतै
चान हस्तै जखन
चान खिलतै जखन
जग जगमग हेतै
चान बचतै जखन
चान जगमग करै
चान झकझक करै
चान इज्जत बढा
चान चकमक करै
चान धटतै जखन
चान बटतै जखन
जग खन्डहर हेतै
चान मरतै जखन ।
दिनेश रसिया
२०७३,३,१०