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गीत

गीत

कि बतैयौ तोरा भैया हौ अत्याचार भ गेलै
अपने इ घरमे, मधेसी उपरमे गोलीके बौछार भ गेलै
कि बतैयौ तोरा भैया हौ अत्याचार भ गेलै ।।

गेलै बुधना भोरे हौ ,भैया अधिकारक जोगार मे
हौ भैया अधिकारक जोगार मे ।
बैसलै छेलौ निर्दय कसैया मौका के तलासमे
हौ भैया मौकाके तलासमे
सबकोइ नारा लगेल्कै , उ निसाना लगेल्कै
गोली सिधे सिनाके पार भ गेलै
कि बतैयौ तोरा भैया हौ अत्याचार भ गेलै ।

ओसरामे बैसल अपन टुनटुन मगन छेलौ
उ खेलमे हौ भैया मगन छेलै उ खेलमे
ओकरो बैमनमा मारलकै गोली, धदेलकै मृत्युके जेलमे
हौ भैया धदेलकै मृत्युके जेलमे
कि केलकै निदर्दी, काका काकीके जिन्गी अन्हार भ गेलै
कि बतैयौ तोरा भैया हौ अत्याचार भ गेलै

भरखर खोललौ हमे यौ भैया एत नभका दोकान यौ
भैया एत नभका दोकान यौ
बरहल जाइ छै नमहर इ बन्दी, निकलल जाइ छै प्राण यौ
भैया निकलल जाइ छै प्राण यौ
एमहर महंगी बढल छै, करजा सिर पर चढ छै सब लचार भ गे लै
कि बतैयौ तोरा भैया हौ अत्याचार भ गेलै ।

कि बतैयौ तोरा भैया हौ अत्याचार भ गेलै
अपने इ घरमे, मधेसी उपरमे गोलीके बौछार भ गेलै
कि बतैयौ तोरा भैया हौ अत्याचार भ गेलै ।।

दिनेश रसिया लहान सिरहा २०७२,८,१८ गते 

गीत

जीन्गी छै ब्याकुल बनल परिवारके बिना
सगर संसारमे हल्ला छै यौ मिता
नेपाली मरैछै एत अन्न पाइनके बिना ।।
निन्द नै अबैये प्रिय प्राणनाथके आसमे
लहुवेल चिलका कनैये दुधक तलासमे
मुदा छुछे हाथ फक्का कोना मारी
घरमे परल छै लास हुन्कर ,
अपना कौर उठाबी कोना
सीप उजरल छै एत अधिकारके बिना
जीन्गी छै ब्याकुल बनल परिवारके बिना ।।
साउस सशुर दिनभैर रहे मुरझायल
गाइ माल सब भुखले पियासल
जैन नै कि भेलौ ओकर आवाजमे
हुकैरो ने पाबै छै देख दिग्धल आकास बिना
सीप उजरल छै एत अधिकारके बिना
जीन्गी छै ब्याकुल बनल परिवारके बिना ।।

dinesh Rasya 2072/8/17

मिथिला स्टुडेन्ट युनियन नेपालक पहिल बैसार समपन्न



आइ लहानक पशुपति आदर्श  उच्च मा. वि. मे सम्पन्न मिथिला स्टुडेन्ट युनियन नेपालक पहिल बैसार बहुत उत्साहपूर्ण रहल । सन्थााम अध्यक्ष दिनेश रसियाकृ अध्यक्षतामे समपन्न भेल जाहिमे नारायन मधुशाला, रितेश मैथिल,हृदय नारायण यादब, गायत्री सिंहा, सृजना गजमेर,अर्जुनप्रसाद गुप्ता दर्दिला,अमरेश महतो, अनिल महतो, रामदेब यादब, गजेन्द्र गजुर, तेजु मैथिल लगायतक उपस्थिति रहल छल । जैह बैसारमे मैथैलिी भाषा आ सँस्कृतिक बिकास हेतु बहुतरास कार्यक्रमके आयोजना करबाक नियार केल गेल। पहिल चरणमे हरेक महिनाक पहिल सप्ताह सैन दिके बैसार बैसक कार्जक्रमके स्वरुप निर्धारण केल जेत आ काज आगु बढायल जेत । अहिबेर नियार अनुसार स्कूल स्कूल पुइग क विद्यालयमे बौवा बुचि सभके पढाइमे मैथिली भाषाक पाठ्यक्रम समावेस हेतु अपिल केल जेत । निजी तथा सरकारी विद्यालयमे नाटक, प्रहसन, बक्तृत्वकला, हाजरीजवाफ प्रतियोगिता आदिके आयोजना करबाक निर्णय भेल संस्थाक अध्यक्ष दिनेश रसिया जानकारी करेलैन । अहि बीच विभिन्न साहित्यकर्मीके रचना, गीत, गजल, गायन तथा चुटकिलाके बैछार भेल रहे । तेजु मैथिलके आ सृजना गजमेरके स्वर सभहहक उपर जादु क देने रहे । तहिना बाहबाहीमे अर्जुनप्रसाद गुप्ता दर्दिला, नारायण मधुशाला, गजेन्द्र गजुरके कविता रहे । रितेश मैथिलके स्वर आ कमेडी सबके लोटपोट कदेने रहे ।

गीत


सब बीत गेलैय दिन
सुख चैन लेलक के छिन
जिन्दगीमे बिना अहाके
पहाड भेलै जियल....
सब बीत गेलैय.....


बितल जेठक गर्मी
उडल ठोरक नर्मी
साथ अहाके बिन साजन
तरपैये पाइन बिना मछरी
सब बीत.......

सावनमे नचै कोना मोर
चर्कैय हिया बरी जोर
मुदा रुसल सजना
तकैयेने हमरा ओर
सब बीत...

देखै छि हम बाट अहाक
देखु बिते नै दिवाली छैठ
घाट पर यौ बालम
सगँे मांग्बै अपन ललनमा
सब बीत गेलैय ....

सब बीत गेलैय दिन
सुख चैन लेलक के छिन
जिन्दगीमे बिना अहाके
पहाड भेलै जियल....

दिनेश रसिया
२०७२/८/ ९

केहन जमाना आइब गेल





केहन जमाना आइब गेल
दिनेश रसिया

सीताके इ पवित्र भूमि,बुद्धक कहाबे पावन धाम ।
घर घर जत तिलकोर तरैये,गाछमे लटकल मिठगर आम ।
सुरबीर जै धरतीके बेटा,बुघिमानीके बढका बगान ।
लोरिक, दिनाभद्री, सलहेश सन राजाके जत नित हैय गुनगान ।
मुदा लगैये सब किछ हेरागेल, धरम हराके दुर भाइग गेल
मन नै लगैये एत मिता,देखु केहन जमाना आइब गेल ।।

अपन सृङ्गारक नै किछ पुछारी,दोसरके फैसन अछि बड भारी
अपन भाषा बनल लाचारी, दोसरके भाषामे बुझे अपन बुद्धयारी
पढल लिखल हमर बौवा, लगैये हमरा कक्हरबा फेल
मन नै लगैये एत मिता,देखु केहन जमाना आइब गेल ।।

नमस्कारपाती ओर गोरलग्गी बनल य एत कबारी दोकान
गुड मर्निङ आ सरी मिस्टर कहैमे सम्झे अपन अभिमान
गोदना, कजरी ओलक तरकारी जैन नै इ कत हेरा गेल
ट्याटु, हिपहप, पिजाबरगरके देखु बहना धलेल
मैथिली बजनाइ दुर दुहाइ, इंग्लिस कोरियनके अछि खुब मेल
मन नै लगैये एत मिता,देखु केहन जमाना आइब गेल ।।


धोती कुर्ता कत तक अछि, विवाह,मुण्डन और उपनैन
गाम अपन छोइरक घरक जमानसब ढौवालेल भेल पलाइन
धरम करमके बात हेरा गेल,घर घर पसरल दहेजक डाइन
कोशी, कमला, बलान हेरा गेल कण्ठमे उतरल बोतलक ह्वाइन
कोना कहु इ कोना कोना क बृद्धाआश्रम मधेस बनि गेल
मन नै लगैये एत मिता,देखु केहन जमाना आइब गेल ।।

2072/7/12



हम पत्रकार

 हम पत्रकार
              दिनेश रसिया

हम छि एकटा पत्रकार
न्याय दिलाबके लेने छि भार
जकर महिमा रहल अछि अपार
मुदा तैयो किया मरैत अछि पत्रकार

कहाबै छि हमहि देशक तेसर आईख
लगाक सूर्यपंखी घोराक पाईख
अन्याय निकाली हमसब ताईक ताईक
सत्य आ निष्ठा पर रहैछि अटल
तैयो किये पत्रकारेके गर्दैन कटल

हम सब करै छि सत्य तथ्यके खोज
सुबह से सामतक चाहे भुखल रही रोज
चाहे रह परे रौदमे खजुरक पात जेका सोझ
तब जाके करबै छि जन्ताके सही बातके अबगत
तैयो किया सब देखाबैये हमरे लग तागत

बाराके मरायल बिरेन्द्र शाह,कक्रा आयल छल आह
तब मरायल दिदी उमा सिंह,जकरा केलक संसार स बिदा
अखन देखु यादब पौडेलके भेल उहे गती,तैयो नै आयल अछि शान्ति
रोकु इ अत्याचार नै त आब करब हम सब मिलक पत्रकार जनक्रान्ति ।।।

2068-6-9

विवाह

विवाह
विवाह
                             दिनेश रसिया
विवाह दु गोट आत्माके मिलन अछि
नव वर बधु जैहमे परैत अछि
जन्मल संसार छोईर सासुर बैस जाईत अछि
लेकिन भगवान बेटिये के किये इ दिन देखाबैत अछि




बिवाहक ओइ जोडीमे नव घर बसाउँत
इहे आश ल अगाडी बढैत अछि माई बाप
ओही जोडीके बीचमे ल पिसाबैत अछि समाज
दहेज रुपी कङ्खनामे जरैत अछि समाज

घरक ओही झोलमे खसबैत ओ तेल
मरबा सँ घुरैत अछि वर होइत नई अछि मेल
समाजक ई गन्दगी सँ बैच जाईत जौ कोई
साशुरमे आईग लगा हुन्का माइर दैत अछि ओ

केहेन विपत्तीमे फसल अछि इ समाज
बिवाह बन्ल अछि ढौवा कौरीके बजार
ई बिवाहके कनङ हेतै उधार
जगु यौ युवा करु दहेजक प्रतिकार